संत रामपाल जी महाराज ने सत्संग करना सन 1994 में से अपने गुरुदेव स्वामी रामदेवनन जी के आज्ञा अनुसार किया था। शुरुआत में संत रामपाल जी महाराज ने घर-घर गांव-गांव जाकर सत्संग किया।
उसके बाद सन 1997 में संत रामपाल जी को कबीर परमेश्वर द्वारा सार शब्द देने की आज्ञा मिली उसके बाद सन 1999 में संत रामपाल जी महाराज ने सतलोक आश्रम करोंथा की स्थापना 4 दिवसीय संत समारोह करके आरंभ किया गया था।
12 जुलाई सन 2006 को सतलोक आश्रम करोंथा पर आर्य समाज की पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश की सच्चाई सामने आने के कारण आर्य समाजियों ने सतलोक आश्रम करोंथा पर सरकार के साथ मिलकर आक्रमण किया। 22 महीने संत रामपाल जी महाराज ने निर्दोष होते हुए जेल में बिताए।
उसके बाद संत रामपाल जी महाराज के भक्तो ने बरवाला में न्यू सतलोक आश्रम बनाया। संत रामपाल जी महाराज ने वही पर सत्संग किया धीरे-धीरे संत रामपाल जी महाराज के तत्वज्ञान से प्रभावित होकर भक्तों की संख्या लाखो में पहुंच गई।
18 नवंबर सन 2014 को सतलोक आश्रम बरवाला पर फिर सरकार द्वारा 40,000 पुलिस भेज कर वापिस एक भयंकर हमला किया और पुलिस द्वारा 5 महीना और एक बच्चे को मार गिराए और कई झूठे आरोप लगाकर संत रामपाल जी महाराज को अरेस्ट कर लिया वो झूठे आरोप आज भी न्यायालयों में चल रहे हैं।
अधिक जानकारी के लिए संत रामपाल जी महाराज की पुस्तक "जीने की राह" पढ़े, संत रामपाल जी महाराज के सत्संगो को ध्यान पूर्वक सुने।
जीने की राह पुस्तक:-
दोस्तो जीने की राह पुस्तक संत रामपाल जी महाराज द्वारा समाज सुधार के उद्देश्य से लिखी गई थी तथा ये पुस्तक घर घर में रखने योग्य है दोस्तों इस पुस्तक ने इंटरनेट पर एक महीने में 50 लाख लोगों द्वारा डाउनलोड किया जाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड इसके नाम है। तो दोस्तो आप क्यों चौंक रहे हो आप भी आज ही जीने की राह पुस्तक को डाउनलोड करें और ध्यान पूर्वक स्वयं पढ़े और अपने अशिक्षित(अनपढ़) परिजनों को स्वयं पढ़कर सुनाए।
दोस्तों इस पुस्तक के इतने पॉपुलर होने का असली कारण है इसके चमत्कारी प्रमाण इस पुस्तक में ऐसे-ऐसे प्रमाण दिए गए हैं कि इसको पढ़ने मात्र से ही पाठक नशा, शराब, मांस, तम्बाकू, बीड़ी-सिगरेट आदि नशा करना तो दूर उन्हे छूने से भी डर लगने लग जाता हैं।
।। सत साहेब - राम राम।।

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