संत रामपाल जी महाराज ने इतनी पुस्तकों की रचना क्यों की जैसे:- ज्ञान गंगा, जीने की राह, गीता तेरा ज्ञान अमृत।
संत रामपाल जी महाराज ने इतनी सारी पुस्तकों की रचना सैकड़ों, हजारों सालो से उलझे हुए आध्यात्मिक तत्वज्ञान को उजागर करने के लिए की थी। क्योंकि कबीर परमात्मा पहली बार काल लोक में हम सभी जीवों की सुध लेने आए थे तो काल ने कबीर परमात्मा से कहा था कि तीन युगों में थोड़े जीव ले जाना और चौथा जब कलयुग आए तब बहुत सारे जीव ले जाना और चौथे कलयुग में पहले मेरे दूत जावे जो आध्यात्मिक ज्ञान उलझा देंगे। यही कारण था कि काल के दूत द्वारा उलझाए हुए आध्यात्मिक ज्ञान को सुलझाने के लिए संत रामपाल जी महाराज ने इतनी सारी पुस्तकों की रचना की क्योंकि ये कलयुग का वो समय हैं जब सभी आत्माएं सद भक्ति करके सतलोक जायेगी।
दोस्तों संत रामपाल जी महाराज ने वैसे तो सैकड़ों पुस्तकों की रचना की हुई हैं जिनमे से कुछ पॉपुलर पुस्तके हैं जैसे ज्ञान गंगा, जीने की राह, गीता तेरा ज्ञान अमृत, अंध श्रद्धा भक्ति खतरा ए जान।
दोस्तों वैसे तो सभी पुस्तकों में ज्ञान तो केवल एक ही हैं लेकिन आध्यात्मिक तत्वज्ञान को सुलझाने का तरीका अलग-अलग हैं। इसलिए संत रामपाल जी महाराज ने इतनी सारी पुस्तकों की रचना की हुई हैं।
उदाहरण:- कुएं में डूबी हुई बाल्टी को बाहर निकालने के सैकड़ों हजारों की संख्या में घुमावदार आंकड़े बनाकर कुएं में डाला जाता हैं पता नहीं वो बाल्टी कौनसे आंकड़े में उलझ जाये। इसी प्रकार हम काल के जाल में फंसी आत्माएं उस कुएं में गिरी बाल्टी समान है हमें गुरूदेव संत रामपाल जी महाराज इस काल के कुएं से निकालने के लिए बहुत सारे आंकड़े डाले हुए हैं।
जीने की पुस्तक
दोस्तों जीने की राह पुस्तक संत रामपाल जी महाराज ने भारतीय समाज को सुधारने के उद्देश्य से लिखी गई है ताकि जगत के लोग भी अपने इस जीवन को खुश और चहन पूर्वक बिताए। इस पुस्तक को पढ़ने से लाखों लोग अपना नशा आदि त्याग चुके हैं। जिन लोगों ने लाखों नशा मुक्त केंद्रों के चक्कर लगा कर भी नशा नहीं छोड़ा उन्होंने इस पुस्तक को पढ़ने मात्र से ही नशा त्याग दिया।
ज्ञान गंगा
दोस्तों ज्ञान गंगा पुस्तक का बदला हुआ नाम है इस पुस्तक को सुप्रीम कोर्ट तक के वरिष्ठ अधिकारियों ने पढ़कर इस पुस्तक की तारीफे की। इस पुस्तक को शुरू में जितने भी लोगो ने पढ़ा वो सभी लोक इस पुस्तक की बहुत तारीफे करते हैं मैने भी बचपन में खुद पहले इस पुस्तक को पढ़ा था। मेरे रिश्तेदारों और भाई बहनों ने भी इस पुस्तक को काफी ज्यादा पसंद किया था मेरे घर में तो बचपन में इस पुस्तक को पढ़ने की लालसा के कारण मैं खुद घर में झगड़ने लगता था।

0 टिप्पणियाँ