दोस्तों इंटरनेट पर आज कल कुछ भी वायरल हो जाता है और लोग उन वायरल चीजों पर बिना सोचे विचार किए बिना उसकी सच्चाई को परखे उन अफवाओ पर बड़ी आसानी से यकीन भी कर लेते हैं लेकिन दोस्तो वास्तव में वो फेक चीज ही होती हैं।

आज मैं आपको एक और ऐसी वायरल सच्चाई के बारे में बताने जा रहा हूं कि अश्वत्थामा महाभारत का पात्र आज भी जिंदा हैं दोस्तो जब आप गूगल पर सर्च करोगे "अश्वत्थामा जिंदा हैं" तो आपको पूरा गूगल भरा मिलेगा कि अश्वत्थामा जिंदा हैं यहां देखा - वहां देखा ।



दोस्तों आज कल लोग पैसे कमाने के लिए ना जाने कितनी फेक पोस्ट गूगल पर मौजूद हैं आज मैं आपको इसकी सच्चाई बताने जा रहा हूं कि क्या वास्तव में अश्वत्थामा जिंदा हैं।

दोस्तो अश्वत्थामा महाभारत का वह पात्र हैं जिसने महाभारत युद्ध होने के बाद दुर्योधन को पांडवों के सिर लाकर देने का वचन दिया अश्वत्थामा रात के समय पांडवों के शिविर में घुसा और द्रोपदी के पांचों पुत्रों की हत्या पांडव समझ कर कर दी और साथ में अन्य कई लोगो की हत्या की। जब पांडवो को इस बारे में पता चला तो भीम अश्वत्थामा को मारने चल पड़ा अश्वत्थामा ने अपने बचाव में ब्रह्मास्त्र छोड़ा और फिर अर्जुन ने भी लोट में ब्रह्मास्त्र छोड़ा कहा जाता है कि दोनो अस्त्र के आपस में टकराने से भयंकर विनाश होता है उस विनाश को रोकने के लिए ऋषि व्यास और नारद मुनि दोनो अस्त्रों के बीच में आ खड़े हुए।

ऋषि व्यास के कहने से अर्जुन ने तो अपने अस्त्र वापस ले लिया परंतु अश्वत्थामा को अस्त्र वापस लेना नही आता लेकिन वो उसकी दिशा को जरूर चेंज कर सकता था उसने उसकी दिशा को पांडवो की बहु उत्तरा के गर्भ की दिशा की और मोड़ दी।

श्री कृष्ण ने अश्वत्थामा से कहा कि एक ब्राह्मण के आशीर्वाद से ये पुत्र प्राप्त हुआ है ये तेरे अस्त्र से नही मर सकता और श्राप दिया कि तुम 3 हजार वर्ष तक इस पृथ्वी पर भटकते रहोगे।

सोचने वाली बात

दोस्तों अश्वत्थामा को श्राप मिला था 3000 वर्ष तक पृथ्वी पर भटकते रहने का पुस्तक हिमालय तीर्थ और संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित पुस्तक "जीने की राह" में प्रमाण सहित ये बताया गया है कि कलयुग के 5505 ये ज्यादा वर्ष बीत चुके हैं और महाभारत का युद्ध आज से लगभग 5000 वर्ष पहले हुआ था। पुस्तक हिमालय तीर्थ में बताया गया है कि कलयुग के 3000 साल बाद आदि शंकराचार्य(हिंदू धर्म संस्थापक) का जन्म हुआ। आदि शंकराचार्य का जन्म आज से लगभग 500 ई सा पूर्व हुआ था। मतलब आज से 2500 साल पहले तक अश्वत्थामा पृथ्वी पर भटकता रहा और फिर भटक कर मर गया। अश्वत्थामा को 3000 हजार साल तक भटकने का श्राप लगा था ना कि कलयुग के अंत तक भटकने का श्राप लगा।

इससे सिद्ध हुआ कि अश्वत्थामा की मृत्यु तो आज से लगभग 2500 साल पहले ही हो चुकी थी। ये जितने भी इंटरनेट पर आपको अफवाए देखने को मिलेगी "अश्वत्थामा जिंदा हैं" सभी झूठी साबित हुई।

दोस्तो आप सब से निवेदन है कि आपने महाभारत को अच्छे से ना पढ़कर इन अफवाओ पर यकीन कर लिया। 

अब तो आप जान ही गए होंगे अश्वत्थामा की सच्चाई की अश्वत्थामा मर गया आज से 2500 साल पहले।

दोस्तो मैं आपका दोस्त अजय दास परमेश्वर की दया से लाता रहेगा इंटरनेट पर फैली हुई अफवाओ का मुंह तोड़ जवाब।